जनरेटर किसे कहते हैं? (What is a Generator?), जनरेटर करंट कैसे बनाता है:
AC जनरेटर करंट कैसे बनाता है: Pagal Engineer की सरल व्याख्या
नमस्ते Pagal Engineer परिवार! आज हम बिजली के एक ऐसे अद्भुत स्रोत के बारे में बात करेंगे, जिसने हमारी आधुनिक दुनिया को रोशन किया है – AC जनरेटर। आपने अक्सर देखा होगा कि जब लाइट चली जाती है तो जनरेटर चालू होते हैं, या फिर बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में, यहां तक कि आपके घरों में भी कई उपकरण AC (Alternating Current) से चलते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि ये जनरेटर आखिर करंट बनाते कैसे हैं?
आज इस पोस्ट में, हम AC जनरेटर के A to Z को समझेंगे, उसके हर हिस्से को जानेंगे, और देखेंगे कि कैसे यह यांत्रिक ऊर्जा (mechanical energy) को विद्युत ऊर्जा (electrical energy) में बदल देता है। तो चलिए, बिना किसी देरी के इस रोमांचक यात्रा को शुरू करते हैं!
जनरेटर किसे कहते हैं? (What is a Generator?)
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| Diesel Generator |
सबसे पहले, यह समझना ज़रूरी है कि जनरेटर क्या है। सरल शब्दों में, जनरेटर एक ऐसी मशीन है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। यह ऊर्जा संरक्षण (conservation of energy) के सिद्धांत पर काम करता है, जहाँ ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है, बनती या नष्ट नहीं होती।
जनरेटर मुख्य रूप से विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर आधारित होते हैं, जिसकी खोज माइकल फैराडे ने की थी। इस सिद्धांत के अनुसार, जब एक कंडक्टर (चालक) एक चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) को काटता है, या चुंबकीय क्षेत्र एक कंडक्टर को काटता है, तो कंडक्टर में विद्युत वाहक बल (Electromotive Force – EMF) उत्पन्न होता है, जिससे करंट प्रवाहित होता है।
आइए, अब उन स्रोतों पर नज़र डालते हैं जो जनरेटर को घुमाने के लिए यांत्रिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। इन्हें प्राइम मूवर (Prime Mover) कहा जाता है।
प्राइम मूवर: जनरेटर को घुमाने वाली शक्ति (The Power that Drives the Generator)
एक जनरेटर खुद से नहीं घूमता; उसे घुमाने के लिए एक बाहरी बल की आवश्यकता होती है। यही बल प्राइम मूवर कहलाता है। विभिन्न प्रकार के प्राइम मूवर होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
1. इंजन (Engine):
A. डीजल इंजन (Diesel Engine): छोटे और मध्यम आकार के जनरेटर सेट में सबसे आम। यह डीजल को जलाकर यांत्रिक ऊर्जा पैदा करता है।
| एक डीजल जनरेटर सेट का उदाहरण, जिसमें इंजन और अल्टरनेटर जुड़े हुए हैं। |
B. गैस इंजन (Gas Engine): प्राकृतिक गैस या प्रोपेन का उपयोग करता है। अक्सर उन जगहों पर इस्तेमाल होता है जहाँ प्राकृतिक गैस की आपूर्ति उपलब्ध हो।
C. पेट्रोल इंजन (Petrol Engine): छोटे पोर्टेबल जनरेटर में प्रयोग होता है।
AC जनरेटर का दिल: अल्टरनेटर (The Heart of AC Generator: Alternator)
जनरेटर का वह हिस्सा जो वास्तव में बिजली पैदा करता है, उसे अल्टरनेटर (Alternator) कहते हैं। इसे सिंक्रोनस जनरेटर (Synchronous Generator) भी कहा जाता है। अल्टरनेटर का काम यांत्रिक ऊर्जा को AC विद्युत ऊर्जा में बदलना है।
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| अल्टरनेटर (Alternator) |
अल्टरनेटर मुख्य रूप से दो प्रमुख भागों से मिलकर बना होता है:
- स्टेटर (Stator): यह अल्टरनेटर का स्थिर (stationary) हिस्सा होता है।
- रोटर (Rotor): यह अल्टरनेटर का घूमने वाला (rotating) हिस्सा होता है।
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| Stator |
आइए, इन दोनों भागों को और गहराई से समझते हैं।
अल्टरनेटर के प्रकार (Types of Alternators):
अल्टरनेटर को कई तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है, लेकिन मुख्य रूप से हम इसे इन आधारों पर देखेंगे:
1. फेज़ के आधार पर (Based on Phases):
सिंगल फेज़ अल्टरनेटर (Single Phase Alternator):
A. ये एक ही फेज़ AC करंट पैदा करते हैं।
B. छोटे जनरेटर और घरेलू उपयोग के लिए उपयुक्त होते हैं।
C. इनमें स्टेटर में एक ही वाइंडिंग होती है या सभी वाइंडिंग सीरीज में जुड़ी होती हैं।
D. आउटपुट वोल्टेज समय के साथ साइन वेव (sine wave) के रूप में बदलता है।
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| एक सिंगल फेज़ अल्टरनेटर का वर्किंग डायग्राम और उसका आउटपुट साइन वेव |
थ्री फेज़ अल्टरनेटर (Three Phase Alternator):
ये तीन अलग-अलग फेज़ में AC करंट पैदा करते हैं, जो एक-दूसरे से 120 डिग्री के फेज़ अंतर (phase difference) पर होते हैं।
ये बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन और औद्योगिक उपयोग के लिए आदर्श होते हैं।
इनमें स्टेटर में तीन अलग-अलग वाइंडिंग होती हैं, जिन्हें स्टार (star) या डेल्टा (delta) कनेक्शन में जोड़ा जा सकता है।
थ्री फेज़ पावर अधिक स्थिर और कुशल होती है, खासकर भारी मोटरों को चलाने के लिए।
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एक थ्री फेज़ अल्टरनेटर का 3D डायग्राम और उसके आउटपुट वेव्स |
2. घूमने वाले भाग के आधार पर (Based on Rotating Part):
रोटेटिंग फील्ड टाइप अल्टरनेटर (Rotating Field Type Alternator):
आजकल के अधिकांश बड़े अल्टरनेटर इसी प्रकार के होते हैं।
इसमें रोटर घूमता है और चुंबकीय क्षेत्र पैदा करता है, जबकि स्टेटर स्थिर रहता है और उसमें EMF (करंट) पैदा होता है।
रोटर को DC सप्लाई (एक्साइटर) दी जाती है ताकि वह इलेक्ट्रोमैग्नेट (विद्युत चुंबक) बन सके।
फायदे: हाई वोल्टेज आसानी से जनरेट किया जा सकता है, आउटपुट करंट सीधे टर्मिनल से लिया जा सकता है, और ब्रश और स्लिप रिंग्स पर कम करंट होता है (यदि उपयोग हो)।
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Rotating field type alternator का वर्किंग डायग्राम, जिसमें रोटेटिंग फील्ड और स्टेटर में करंट उत्पादन दर्शाया गया है |
रोटेटिंग आर्मेचर टाइप अल्टरनेटर (Rotating Armature Type Alternator):
यह पुराने प्रकार का या छोटे अल्टरनेटरों में पाया जाता है।
इसमें आर्मेचर (coil) घूमता है और चुंबकीय क्षेत्र स्थिर रहता है (स्थायी चुंबक या DC एक्साइटेड फील्ड)।
आउटपुट करंट को स्लिप रिंग्स और ब्रश के माध्यम से बाहरी सर्किट तक पहुंचाया जाता है।
नुकसान: हाई वोल्टेज और हाई करंट के लिए ब्रश और स्लिप रिंग्स को हैंडल करना मुश्किल होता है, क्योंकि स्पार्किंग की समस्या हो सकती है।
रोटेटिंग आर्मेचर टाइप अल्टरनेटर का 3D डायग्राम, जिसमें रोटेटिंग आर्मेचर और स्लिप रिंग्स दिख रहे हैं।
अल्टरनेटर के मुख्य भाग और उनकी डिज़ाइन (Main Parts of Alternator and Their Design):
आइए, अब अल्टरनेटर के प्रमुख भागों को और उनकी डिज़ाइन को समझते हैं।
1. स्टेटर (Main Stator):
यह अल्टरनेटर का बाहरी, स्थिर फ्रेम होता है।
यह सिलिकॉन स्टील (silicon steel) की लैमिनेटेड शीटों (laminated sheets) से बना होता है, ताकि एड़ी करंट लॉस (Eddy Current Loss) को कम किया जा सके।
इसकी अंदरूनी सतह पर स्लॉट्स (slots) कटे होते हैं जिनमें आर्मेचर वाइंडिंग (armature winding) स्थापित की जाती है। यही वाइंडिंग AC करंट पैदा करती है।
स्टेटर वाइंडिंग आमतौर पर कॉपर (तांबे) के तारों से बनी होती है।
(3D graphic showing the detailed design of a main stator with laminated sheets, slots, and armature winding.)
1. रोटर (Rotor - Field):
यह अल्टरनेटर का घूमने वाला हिस्सा होता है जो चुंबकीय क्षेत्र पैदा करता है।
रोटर दो प्रकार के होते हैं:
सैलियंट पोल रोटर (Salient Pole Rotor): इसमें पोल (Poles) बाहर की ओर निकले हुए होते हैं। ये कम गति वाले अल्टरनेटर (जैसे हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट) में उपयोग होते हैं।
सिलिंड्रिकल पोल रोटर (Cylindrical Pole Rotor) / स्मूथ सिलिंड्रिकल रोटर: यह बेलनाकार और चिकना होता है। ये उच्च गति वाले अल्टरनेटर (जैसे थर्मल और न्यूक्लियर पावर प्लांट) में उपयोग होते हैं।
रोटर पर फील्ड वाइंडिंग (field winding) लपेटी जाती है, जिसे DC करंट (एक्साइटर से) दिया जाता है ताकि यह एक शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट बन सके।

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